भिक्षावृत्ति एक अभिशाप

भिक्षावृत्ति हमारे देश में एक अभिशाप है। घर से बाहर निकलते हुए आप लोगों ने भी कई भिखारी देखे होंगे। मैले कुचैले कपडे पहने हुऐ, सड़क किनारे, चौराहों पर, मन्दिर की सीढ़ियों पर आपने बच्चों से लेके बुजुर्ग तक सभी उम्र के भिखारी देखे होंगे। लेकिन क्या कभी हमने सोचा है ये इतने भिखारी हमारे देश में आते कहाँ से हैं ? आखिर क्या वजह है जो इन लोगों को भीख मांगनी पड़ रही है ? 
कुछ तो कारण होगा जो इतने सारे लोग इस घृणित कार्य को करने पर मजबूर हो जाते हैं ।

आइये आज विचार करते हैं कुछ कारणों पर

  1. गरीबी 

     सबसे पहला कारण जो हमारे दिमाग में आता है वो है गरीबी। जी हाँ दोस्तों आज भी हमारा देश बहुत गरीब है। कितने ही लोग आज भी हमारे देश में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं। लेकिन यह जरूरी नही कि जो गरीब हो वो भिखारी ही होगा।

बहुत से गरीब लोग मेहनत मजदूरी करके भी अपना पेट पालते हैं। कितने ही मजदूर लोग दिन भर मेहनत करते हैं लेकिन भीख नही मांगते। उनका पूरा परिवार उनके साथ ही रहता है। चाहे बारिश हो, सर्दी हो या कोई भी मौसम हो वो सारा दिन मेहनत मजदूरी करते रहते हैं। कितने ही लोग सड़कों पर, चौराहों पर छोटी मोटी चीजें बेचते हैं और अपना पेट पालते हैं लेकिन भीख नही मांगते। तो अब ये सिद्ध हो गया कि गरीबी किसी भी रूप में भिक्षावृत्ति का कारण नही हो सकती।

  1. क़ानून का अभाव

   जी हाँ दोस्तों हमारे देश में सख्त क़ानून का अभाव होना ही भिक्षावृत्ति का सबसे बड़ा कारण है। हमारे देश में भीख माँगना कोई गैर कानूनी काम नही है।

अमेरिका जैसे विकसित देश में भीख माँगना गैर कानूनी है। अगर ऐसा ही हमारे देश में हो जाये तो निश्चित रूप से भीख मांगने वालों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

  1. लाखों का business

    भीख मंगवाना आजकल लाखों कमाने का धंधा बन चुका है। आपने कई बार न्यूज़ चैनल और अखबारों में भी पढ़ा होगा किस प्रकार कुछ असामाजिक तत्व, माफिया, गुंडे लोग छोटे छोटे बच्चों का अपहरण करके उनसे भीख मंगवाते हैं। ये लोग बच्चों को उनके शहर से दूर ले जाते हैं और उनको अपंग बना कर उनको भीख मांगने के लिए मजबूर करते हैं। इन बच्चों की सुनने वाला कोई नही होता। कुछ बच्चे तो इतने छोटे होते हैं कि वो अपने माता पिता या घर के बारे में कोई भी जानकारी नही बता पाते। ऐसे में इन बच्चों की मदद कैसे की जा सकती है? कई बार माफिया गुंडों की पहुँच इतनी ऊपर तक होती है कि पुलिस भी कोई कार्यवाही नहीं करती। 

  ये सारा खेल demand and supply का है। ये बच्चे जितना ज्यादा पैसा कमा के लाते हैं उतना ही इन गुंडे माफियाओं के हौसले बढ़ जाते हैं। ये लोग और बच्चों का अपहरण करते हैं और ये सिलसिला बढ़ता ही जाता है जिसका कोई अंत नही है।

   तो दोस्तों हम सबको बस एक ही काम करना है कि चाहे किसी भी उम्र का कोई भी भिखारी हो हमे उसको भीख नही देनी है। जब हम इस प्रकार भीख देना बन्द कर देंगे तो ये धंधा भी एक दिन पूरी तरह से बन्द हो जायेगा।

हम आप लोग मिलकर ही इस अभिशाप को दूर कर सकते हैं। 

  इसी दिशा में एक प्रयास No More Missing के नाम से शुरू किया गया है। facebook पर इसी नाम से एक पेज बनाया गया है 

NO MORE MISSING

जिसमे सारे देश के खोये हुए बच्चों का database बनाया गया है। 
  आप को भी यदि कोई बच्चा भीख मांगता हुआ दिखाई दे तो उसको भीख न देकर उसकी एक फ़ोटो ले लीजिये और उसको No More Missing के पेज पर upload कर दीजिये। आपके द्वारा किया गया ये छोटा सा प्रयास किसी बिछड़े हुए बच्चे को उसके परिवार से मिला सकता है। किसी के चेहरे पर खोयी हुई खुशियाँ वापस ला सकता है। उन छोटे छोटे बच्चों का खोया हुआ बचपन वापस ला सकता है। आजकल सभी लोग online तो रहते ही हैं। क्या हम और आप मिलकर इतना छोटा सा प्रयास भी नही कर सकते ?

अवश्य कर सकते हैं। हम सभी के सम्मिलित प्रयास से ही ये अभियान सफल हो सकेगा।

  WeBSITE link for no more missing is here

http://www.nomoremissing.com/

हिम्मत न हारने वाले मेंढक की कहानी

एक तालाब था जिसमें विभिन्न प्रकार के जलीय जीव जन्तु मछली केकड़े आदि रहा करते थे। उसी तालाब में एक मेंढक भी रहता था। उसी तालाब के किनारे थोड़ी दूर पर एक धूर्त बगुला भी रहा करता था जो अपनी भूख मिटाने उस तालाब में आया करता था। एक दिन वो धूर्त बगुला तालाब के किनारे आया और आँख बन्द करके ध्यान लगाने का ढोंग करने लगा। उसको देखकर सारे जलीय जीव वहां से दूर भाग गए। थोड़ी देर बाद उन्होंने देखा की वो बगुला बिल्कुल शांत होकर अपना ध्यान लगा के बैठा हुआ है। धीरे धीरे वो सारे जीव उस बगुले के आस पास आकर घूमने लगे लेकिन बगुला फिर भी आँख बन्द करके ध्यानमग्न होकर बैठा रहा। उसके बाद तो सबको निश्चय हो गया कि ये बगुला उनको कोई नुकसान नही पहुँचायेगा और वो सब आराम से उसके आस पास आने जाने लगे। 

   थोड़ी देर के बाद उस बगुले ने अपनी आँखे खोली और अपने आस पास विभिन्न प्रकार के जलीय जीवों को घूमते हुए पाया। ये देख कर उसके मुंह में पानी आ गया लेकिन वह फिर भी चुपचाप ध्यानमग्न होने का ढोंग करता रहा। 

   काफी देर से वो मेंढक ये सब देख रहा था। पहले तो बगुले के पास जाने की उसकी हिम्मत ही नही हुई लेकिन जब उसने देखा कि बगुला किसी को कोई नुकसान नही पहुंचा रहा है तो उससे रहा नही गया और वो भी बगुले के पास पहुंच गया। 

  मेंढक ने बगुले से पूछा “आप ये ध्यान क्यों कर रहे हैं ?”

बगुले ने शांत भाव से उत्तर दिया ” मुझे ज्ञान की प्राप्ति हो चुकी है। अहिंसा परमो धर्मः । मैंने आज तक कई जीवों का शिकार किया है। अब मैं किसी का शिकार नही करता। अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए ही मैं ध्यान कर रहा हूँ। तुम लोगों को मुझसे डरने की जरूरत नही है।” 

  यह सुनकर मेंढक काफी प्रभावित हुआ और थोडा सा लापरवाह होकर वो बगुले के एकदम पास चला गया। मेंढक ने पूछा ” आपको इस ज्ञान की प्राप्ति कहाँ से हुई ?”

  गड़प

और अगले ही पल मेंढक बगुले की चोंच में था। बगुला अपनी चालाकी पर इतराने लगा। लेकिन मेंढक ने भी हिम्मत नही हारी। उसने एक पैर के पंजे में बगुले की गर्दन पकड़ ली। अब तो बगुले की हालत खराब होने लगी। उसने काफी कोशिश की लेकिन मेंढक ने उसकी गर्दन नही छोड़ी। अंत में हारकर बगुले ने मेंढक को आजाद कर दिया तब जाके उसकी जान छूटी।
तो दोस्तों इस कहानी से हमने सीखा कि चाहे जैसी भी विषम परिस्थितियां हों हमे हिम्मत नही हारनी चाहिये और विवेक, साहस, धैर्य के साथ उस परिस्थिति का मुकाबला करना चाहिये।

आरक्षण एक बीमारी

​CBSE ने JEE Mains का result  जारी कर दिया……

वर्ष 2017 का result का cut off इस प्रकार है…..
GEN – 81 marks

OBC – 49 marks

SC – 32 marks

ST – 27 marks
अब एक बार सभी category के cut off पर नजर दौड़ाइये……
GEN Cat. में वही छात्र select हुआ जिसने Exam में 81 या इससे अधिक marks लाया…. यानी कि 80 तक marks लाने वाला छात्र selection के लायक नहीं है…. यानी कि वह प्रतिभावान नहीं है…. यानी कि उसने इस साल Exam की तैयारी में ठीक से मन नहीं लगाया…. यानी कि उसने गलत संगति में पड़ कर इस साल मौका गँवा दिया…. यानी कि उसको अब अगले साल के लिए जम कर तैयारी करनी चाहिए…
या फिर उसकी मर्जी, जो करे……

चाहे तो ग्लानि से फाँसी लगा ले…. 

चाहे तो घर से भागकर दिल्ली/मुम्बई चला जाए…. 

चाहे तो यह मान ले कि इस Exam में select होना उसके बस की बात नहीं है… 

चाहे तो इससे अलग और कोई Gen Compt. की तैयारी करें… 

चाहे तो फिर मां-बाप के साथ किसानी में हाथ बटाये…. 

चाहे तो पान का छोटा सा गुमटी लगा ले….
सरकार ऐसे मंद बुद्धि छात्रों को ढोने के लिए बाध्य  नहीं है… 

भारत निर्माण में ऐसे 80 marks वाले कुपोषित छात्रों का क्या मतलब? 

देश की बुनियाद ठोस होनी चाहिए और ठोस बुनियाद के लिए devloped skill का होना जरूरी है… इसलिए सरकार को किसी प्रकार का risk नहीं लेना चाहिए…. नव भारत निर्माण के लिए कोई समझौता नहीं करना चाहिए।
अब आइये SC/ ST के cut off marks पर…..

इस बार SC/ ST Category में वही छात्र select हुआ है जिसने Exam में 27/32 तक marks प्राप्त किया है….. यानी कि 27/32 तक marks लाने वाला छात्र इसके लायक है…. मतलब कि वह प्रतिभा के धनी है….. यानी कि इस साल उसने Exam के लिए जम कर तैयारी की थी … मतलब कि ऐसे होनहार छात्र को देश निर्माण में अहम योगदान है।

सरकार नहीं चाहती कि ऐसे होनहार छात्र दिल्ली/मुम्बई भागे…. 

या कोई पान की गुमटी लगाए…. 

या Gen. Compt. की तैयारी कर कोई clerk बने….

या किसानी करें….

आखिर एक सजग सरकार को इसकी प्रतिभा का अपमान करने का किसने हक दिया है?

नव भारत निर्माण के लिए ऐसे 27/32 वाले प्रतिभावान छात्र को ignore कैसे किया जा सकता है? …आखिर देश की बुनियाद को मजबूत करने की बात है, कोई मजाक नहीं। 

देश के संविधान को शत शत नमन।

Incredible India

देश का दुर्भाग्य

​आज का समाचार पत्र उठाया तो सबसे ऊपर ये खबर थी 

‘ आतंकी हमले में सेना के 6 जवान शहीद ‘

दिल आतंकवादियों के प्रति घृणा से भर गया। उसके बाद नीचे नजर डाली तो मोटे मोटे अक्षरों में लिखा था

‘ प्रधान मंत्री और गृह मंत्री ने हमले की कड़ी निंदा की ‘

और उसके नीचे और भी खबरें थीं

‘ पूर्व बैंक कर्मी ने अपनी जमा पूंजी से 1 करोड़ रूपये defense fund में दान में दिये ‘

‘ फ़िल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने 20 लाख रूपये मरने वाले शहीदों के परिवार वालों को देने का एलान किया ‘

इसी तरह की और भी खबरें थीं। पूरा का पूरा समाचार पत्र इसी तरह की ख़बरों से भरा पड़ा था। बड़े बड़े नेताओं ने अपनी अपनी तरीके से आतंकवादी हमले की निंदा की हुई थी । 

लेकिन मेरे दिमाग में एक चीज बार बार घूम रही थी कि इस देश के जनप्रितिनिधियों में से कोई भी इन शहीदों के परिवार वालों की सहायता करने के लिए आगे क्यू नही आता ? भले ही सरकार की ओर से शहीदों के परिवार वालों के लिये सहायता राशि का एलान किया जाता है लेकिन ऐसा कभी नही सुना कि किसी बड़े नेता ने व्यक्तिगत रूप से अपनी ओर से ऐसे किसी की सहायता की हो ??

आखिर ऐसा क्यू है ? शायद यही इस देश का दुर्भाग्य है।

जेल से निकलना है तो सुरंग बनाइये!

जेल से निकलना है तो सुरंग बनाइये!

आपने movies में कोई ऐसा scene ज़रूर देखा होगा जिसमे hero jail से भागने के लिए एक सुरंग बनाता  है और finally उस जेल से फरार हो जाता है. काफी exciting होता है ये, नहीं!

पर आज मैं आपको खुद यही काम करने के लिए कह रहा हूँ …मैं आपको एक सुरंग बनाने के लिए कह रहा हूँ..क्योकि आप भी अपनी life के hero हैं और unfortunately एक virtual jail में क़ैद हैं …एक ऐसी जेल जिसमे जाने से पहले आपको पता भी नहीं था की वो एक जेल है….. आप किसी ऐसी job, business या काम में फंस चुके हैं जो आपको बिलकुल पसंद नहीं है …कभी कभी तो आप frustrated feel करते हैं …क्योंकि आप यहाँ वो नहीं कर रहे होते जो आप सबसे अच्छे ढंग से कर सकते हैं…आप खुद इसे छोड़ना भी चाहते हैं लेकिन financial obligations की वजह से छोड़ नहीं पाते.. Continue reading “जेल से निकलना है तो सुरंग बनाइये!”

धोखा (कहानी)

यह एक सच्ची कहानी के ताने-बाने पर बुनी कथा है।

सुषमा बड़ी साधारण सी लड़की थी. बदसूरत तो नहीँ कहेंगे. पर सुंदरता के भी कोई विशेष चिन्ह नहीँ थे उसमे. चपटी और आगे से फैली नासिका ने चेहरे को थोड़ा और बिगाड़ दिया था.

अचानक ही एक दिन बड़े अच्छे परिवार से रिश्ता आया. सब हैरान थे. चट मँगनी और पट ब्याह हो गया. बारात और दूल्हे को देख सुषमा की साखियां, रिश्तेदा और मुहल्ला रश्क़ से बोल उठा – सब इतना अच्छा है. तो क्या हुआ , लड़का तो बेरोजगार ही है ना ? Continue reading “धोखा (कहानी)”

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

चौबे जी का लड़का है अशोक, एमएससी पास।
नौकरी के लिए चौबे जी निश्चिन्त थे, कहीं न कहीं तो जुगाड़ लग ही जायेगी।
ब्याह कर देना चाहिए।
मिश्रा जी की लड़की है ममता, वह भी एमए पहले दर्जे में पास है, मिश्रा जी भी उसकी शादी जल्दी कर देना चाहते हैं। Continue reading “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”

कैसे एक taxi driver बना अरबपति

दोस्तों आज vermajikablog.com पर पढ़िये Landmark Group की स्थापना करने वाले मिकी जगतियानी की संघर्षपूर्ण motivational story

मिकी जगतियानी जो पहले एक taxi driver थे, को खुदरा व्यापार का राजा Retail king भी कहा जाता है। मिकी जगतियानी दुबई के “LandMark Group” के मालिक हैं। तथा उनकी कुल सम्पत्ति लगभग 6.6 बिलियन डॉलर (44240 करोड़ रूपये by Bloomberg 2016) है।

Continue reading “कैसे एक taxi driver बना अरबपति”

घर बैठे आधार कार्ड में नाम,जन्म तिथि आदि कैसे ठीक करें

 

दोस्तों आज vermajikablog.com पर पढ़िए आधार कार्ड में नाम, जन्म तिथि आदि यदि गलत है तो कैसे ठीक करें वो भी अपने घर बैठे 

CORRECT OR CHANGE NAME, ADDRESS, DATE OF BIRTH ETC. IN AADHAR CARD 

DO IT YOURSELF

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